आज पहली बार हुआ होगा जब ब्लॉगी राम ने गणतंत्र दिवस की परेड ना देखकर यूट्यूब चैनलों पर सारा दिन किसान आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां देखी।
मन काफी व्यथित है कि देश में यह क्या हो रहा है?
आज किसानों की आड़ में कुछ शरारती तत्व लग रहे थे ।
करीब 2 महीने के शांतिप्रिया किसान आंदोलन को आज बदनामी का काला कलंक लग गया।
किसानों का आंदोलन अब शांति प्रिया अनुशासन से भरा हुआ और नेतृत्व विहीन लग रहा था।
दिल्ली पुलिस k83 जवान आज जख्मी हुए हैं।
किसानों के ऊपर होने वाले आंसू गैस का प्रयोग भी कहां उचित था।
साफ-साफ कुछ समझ नहीं आ रहा है हो क्या रहा है?
किसान कह रहे हैं कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें भटका या है इसीलिए वे रास्ता भटक कर सरकार द्वारा निर्धारित रोड पर भटक गए।
अब सच्चाई क्या है वही जानते हैं।
कितने लोगों के लिए ट्रैक्टर लाना अलाउड था कितने ट्रैक्टर लाना लोड था यह तो किसान भी जानते हैं।
सरकार और किसानों के बीच में क्या होगा ?क्या होगा समझाता ?कब होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
सबकी खैर की इच्छा करता हुआ आपका दोस्त ब्लॉगी राम।

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