Doctors ..क्यों परेशान है, हमारे डॉक्टर?
1.डॉक्टरी पेशा इस लिए कष्ट में है क्योंकि जबसे यह बना है लोगों के दिमाग़ में ठूंस ठूंस कर भरा है कि यह पुन्य का काम है और डॉक्टर भगवान।अब किसी को सहन नहीं होता कि भगवान अपने काम का मुआवज़ा ले।
2.ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी आपको झोलाछाप डॉक्टरो से ख़ुशी ख़ुशी इलाज करवाते मिल जाएंगे और वहाँ इनका विवेक और ज़ुबान दोनों बंद मिलेंगे।
3.डॉ भी उसी समाज से आते हैं और उसी समाज को झेलने पर मजबूर हैं जहाँ ऐसे बुद्धिजीवी इस बात से बेपरवाह रहते हैं कि पटवारी,तहसीलदार,पुलिस, रेल का बाबू,क्लर्क,मंत्री,विधायक, सिलैक्शन बोर्ड के अधिकारी घूंस के बग़ैर बात नहीं करते और डॉक्टर भी इसे झेलता है।यह सब इनके लिए उचित माना जाता है।
4.यही डॉक्टर यूजी और पीजी में कई अतिरिक्त साल बर्बाद करता है अंधाधुंध और राजनीतिक रेवड़ियों की तरह दिए गए आरक्षण और घोटालों के चलते और मजबूर है कई करोड़ की सीट लेने पर।
5.सब को आधुनिकतम इलाज चाहिए एक छत के नीचे।पैसा कौन देगा?सस्ता कर्ज़ मिलेगा, ज़मीन, बिजली, पानी, फ़ोन,टैक्स?टैक्स हॉलीडे होगा?यहाँ तो एम्बुलेंस भी कमर्शियल सवारी मानी जाती है?
6.वकील एक पेशी के 5 लाख लेने के अधिकारी क्यों और वह भी पता नहीं कब तक
7.मुरथल जैसे ढ़ाबे मे एक रोटी 15/- और दाल फ़्राइड 120/- की क्यों?क्या यह उनकी असली क़ीमत है?एयरपोर्ट पर कॉफ़ी 100 के आस पास क्यों?तब तो किसी की पेशानी पर बल नहीं पड़ते।
7.किसान के यहाँ से चला 5/- का आलू, टमाटर बाज़ार में 50/- क्यों?कौन खा गया/
8.मंत्रियों, अफ़सरों की बेहिसाब,बेनामी संपत्ति क्यों?इतना सन्नाटा क्यों?1000 करोड़ का चारा खाने वाला सज़ायाफ़ता किंगमेकर क्यों महाशय?इनके वेतनमान में 300% उछाल पर बिल्कुल ग़ुस्सा नहीं?
9.किसके हैं डोनेशन वाले कॉलेज?
10.दवा की रिसर्च पर करोड़ों ख़र्च करने वाली कंपनियां क्यों न लाभ लें?कार उद्योग नहीं लेता?शराब, सिगरेट, इलैक्ट्रोनिक उद्योग नहीं लेता?सरकार नहीं लेती?20/- के पैट्रोल की कीमत 60-65/-क्यों?बेस फ़ेयर 1500/-और टिकट का कुल दाम 6000/-क्यों?
11.जैनरिक का राग अलापने वाले सोनी टीवी,ब्रैंडिड कपड़े न लें,Taxila टी वी और पॉपलीन लें।गधे घोड़े में फ़र्क नहीं?
12.स्ट्रैप्टोकाइनेज़ 900/-का और कब लगाना है,इसकी ज़िम्मेदारी किसकी?आप लगा लेंगे?35 साल लगे यहाँ तक आने में?5/-का अल्ट्रा साउंड बताने वाले यह बताएं उस रिपोर्ट को पढ़ने की अक्ल हासिल करने में कितने साल और पैसे लगे,मशीन कहाँ से आई,ख़राब होने पर नई कहाँ से आएगी?
13.अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाने वाले यह जांबाज़,आपकी वजह से अनेक रोग पालने वाले, अकथनीय कष्ट और तनाव झेलने वाले 99% मानवता की सेवा में रत हैं तो पैसा तो लेंगे।आइए ऐड्ज़,हिपेटाइटिस,इबोला,स्वाइन फ़लू,टी बी का सामना करने में इनका साथ दें।आएंगे?नहीं न?
14.महाशय कभी आपने गर्भपात करवाने वाली महिला के परिवार के विरुद्ध आवाज़ उठाई?क्या वह नहीं हिस्सेदार?
15.कमीशन बुरा है नहीं होना चाहिए।कैसे मालूम सभी डॉक्टर लेते हैं?वकील नहीं लेते?वह भी नोबल प्रोफ़ैशन है।टैंडर लेने, बिल पास कराने में सरेआम चल रहा है।फ़िर यहाँ इतना बवेला क्यों?
मतलब इतना है श्रीमन हर अंग में कैंसर है।एक वही अंग जो कुछ बेहतर है आपकी आंख में खटक रहा है।अन्य या तो दिखते नहीं या आपकी हिम्मत नहीं उन पर उंगली उठाने की।
1.डॉक्टरी पेशा इस लिए कष्ट में है क्योंकि जबसे यह बना है लोगों के दिमाग़ में ठूंस ठूंस कर भरा है कि यह पुन्य का काम है और डॉक्टर भगवान।अब किसी को सहन नहीं होता कि भगवान अपने काम का मुआवज़ा ले।
2.ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवी आपको झोलाछाप डॉक्टरो से ख़ुशी ख़ुशी इलाज करवाते मिल जाएंगे और वहाँ इनका विवेक और ज़ुबान दोनों बंद मिलेंगे।
3.डॉ भी उसी समाज से आते हैं और उसी समाज को झेलने पर मजबूर हैं जहाँ ऐसे बुद्धिजीवी इस बात से बेपरवाह रहते हैं कि पटवारी,तहसीलदार,पुलिस, रेल का बाबू,क्लर्क,मंत्री,विधायक, सिलैक्शन बोर्ड के अधिकारी घूंस के बग़ैर बात नहीं करते और डॉक्टर भी इसे झेलता है।यह सब इनके लिए उचित माना जाता है।
4.यही डॉक्टर यूजी और पीजी में कई अतिरिक्त साल बर्बाद करता है अंधाधुंध और राजनीतिक रेवड़ियों की तरह दिए गए आरक्षण और घोटालों के चलते और मजबूर है कई करोड़ की सीट लेने पर।
5.सब को आधुनिकतम इलाज चाहिए एक छत के नीचे।पैसा कौन देगा?सस्ता कर्ज़ मिलेगा, ज़मीन, बिजली, पानी, फ़ोन,टैक्स?टैक्स हॉलीडे होगा?यहाँ तो एम्बुलेंस भी कमर्शियल सवारी मानी जाती है?
6.वकील एक पेशी के 5 लाख लेने के अधिकारी क्यों और वह भी पता नहीं कब तक
7.मुरथल जैसे ढ़ाबे मे एक रोटी 15/- और दाल फ़्राइड 120/- की क्यों?क्या यह उनकी असली क़ीमत है?एयरपोर्ट पर कॉफ़ी 100 के आस पास क्यों?तब तो किसी की पेशानी पर बल नहीं पड़ते।
7.किसान के यहाँ से चला 5/- का आलू, टमाटर बाज़ार में 50/- क्यों?कौन खा गया/
8.मंत्रियों, अफ़सरों की बेहिसाब,बेनामी संपत्ति क्यों?इतना सन्नाटा क्यों?1000 करोड़ का चारा खाने वाला सज़ायाफ़ता किंगमेकर क्यों महाशय?इनके वेतनमान में 300% उछाल पर बिल्कुल ग़ुस्सा नहीं?
9.किसके हैं डोनेशन वाले कॉलेज?
10.दवा की रिसर्च पर करोड़ों ख़र्च करने वाली कंपनियां क्यों न लाभ लें?कार उद्योग नहीं लेता?शराब, सिगरेट, इलैक्ट्रोनिक उद्योग नहीं लेता?सरकार नहीं लेती?20/- के पैट्रोल की कीमत 60-65/-क्यों?बेस फ़ेयर 1500/-और टिकट का कुल दाम 6000/-क्यों?
11.जैनरिक का राग अलापने वाले सोनी टीवी,ब्रैंडिड कपड़े न लें,Taxila टी वी और पॉपलीन लें।गधे घोड़े में फ़र्क नहीं?
12.स्ट्रैप्टोकाइनेज़ 900/-का और कब लगाना है,इसकी ज़िम्मेदारी किसकी?आप लगा लेंगे?35 साल लगे यहाँ तक आने में?5/-का अल्ट्रा साउंड बताने वाले यह बताएं उस रिपोर्ट को पढ़ने की अक्ल हासिल करने में कितने साल और पैसे लगे,मशीन कहाँ से आई,ख़राब होने पर नई कहाँ से आएगी?
13.अपनी जान पर खेल कर दूसरों की जान बचाने वाले यह जांबाज़,आपकी वजह से अनेक रोग पालने वाले, अकथनीय कष्ट और तनाव झेलने वाले 99% मानवता की सेवा में रत हैं तो पैसा तो लेंगे।आइए ऐड्ज़,हिपेटाइटिस,इबोला,स्वाइन फ़लू,टी बी का सामना करने में इनका साथ दें।आएंगे?नहीं न?
14.महाशय कभी आपने गर्भपात करवाने वाली महिला के परिवार के विरुद्ध आवाज़ उठाई?क्या वह नहीं हिस्सेदार?
15.कमीशन बुरा है नहीं होना चाहिए।कैसे मालूम सभी डॉक्टर लेते हैं?वकील नहीं लेते?वह भी नोबल प्रोफ़ैशन है।टैंडर लेने, बिल पास कराने में सरेआम चल रहा है।फ़िर यहाँ इतना बवेला क्यों?
मतलब इतना है श्रीमन हर अंग में कैंसर है।एक वही अंग जो कुछ बेहतर है आपकी आंख में खटक रहा है।अन्य या तो दिखते नहीं या आपकी हिम्मत नहीं उन पर उंगली उठाने की।

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