सोमवार, 21 नवंबर 2016

Visitors drama at hospital

इंडियन कल्चर
जब किसी बीमार से मिलने जायेगे । ऎसे शब्दों का इस्तेमाल करेगे कि बीमार नी मरे तो मर जाये।
जैसे = ओ बई
च च च
ऐसी बीमारी तो पेली बार देखी
उसको ऐसी निगाह से देखेगे कि 10 मिनट बाद मरने वाला हो

क्या आई रिपोर्ट???? रिपोर्ट में भले सूझ कई नी पड़े। पर देखेगे जरूर खासकर xray और ct skin की रिपोर्ट।
जो बॉटल मरीज को चढ़ी हुई हे
उसका नाम जानने की पूरी उत्सुकता होती हे।
बीमार को देखने गया आदमी या औरत MBBS की डिग्री साथ में ले के मिलने जाते हे।
जैसे =
किसको बताया???
अरे रावत साब को बता लो। 1 no डॉक्टर हे। बेचारा मरीज के घरवाला मन ही मन सोचता हे कि मेने कौन से RMP डॉक्टर को बताया यार।
वो ब्यावरा में दवाई देते हे । 3 दिन में सईं कर देते हे।
मरीज के भोजन का पूरा मीनू पूछने के बाद अपना बनाया हुआ मीनू जरूर बताएंगे। कि पानी घर का ही पिलाना । उबला हुआ हो तो और बढ़िया।
दलिया ही खिलाओ यार हल्का रेता हे।

मालूम भले तुरन्त पड़ गई हो पर बोलेंगे ऎसे = में मन्दिर गया तो वा पे मालूम पड़ी जब मेहता जी ने बताया कि आप भर्ती हो।

रिश्तेदारी में किस किस को खबर करी और कौन कौन मिलने आया उसकी पूरी कहानी उनको चाहिए।
कौन कौन कब ड्यूटी दे रहा हे मरीज की। इसकी पूरी जानकारी उनको चाहिए।

जब बीमार हुए तो घर में कौन क्या कर रिया था।किसने किसको खबर करी। कौन अस्पताल ले के आया । ये कहानी का पूरा वर्णन लिया जाता हे।

जाते जाते इतना बतियाएंगे कि जेसे घर पे गेट तक छोड़ के आते हे वेसे ही अस्पताल के गेट तक खीच के ले आते हे।
कुल मिलाकर घर के सारे लोगो को पूछ पूछ के जब तक बीमार नी कर दे और ज्ञान की गंगा नी बहा दे तब तक लोगो के चेन नही पड़ता।
खुद ICU में घुसने की कोशिश करेगे पर बीमार के घरवालो को ज्ञान बाँटेंगे कि ज्यादा जने को अंदर मत जाने दो यार।
और हा
आखरी में एक जरूरी बात
जाते जाते=
अच्छा जउ में।
कोई काम हो तो फोन कर लेना। शर्माना मत। शाम को आता हूँ।
और शाम की जगह 3 दिन बाद आता हे और कहता हे अरे यार आ नी पाया 2-3 दिन से। रोज सोच रिया हूँ की मिल के आउ पर क्या करूँ यार मेरा ये बायाँ पैर बहुत दुःख रिया हे । दवाई खा रिया हूँ।

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