Dr. Vijay Guleria: Hello friends,
आप लोगों ने वह गाना तो सुना होगा दुनिया में कितना गम है ।
मेरा गम कितना कम है दुनिया का गम देखा तो अपना गम भूल गया।
इस ब्लॉग में हम इस बात के ऊपर चर्चा करेंगे कि हमारे देश में इस समय कौन-कौन सी बड़ी समस्याएं हैं?
यदि कोई समस्या यहां लिखने से छूट गए हो तो आप लोग उस समस्या को लिख सकते हैं कमेंटबॉक्स में।
भ्रष्टाचार
भारत की सबसे बड़ी समस्या है करप्शन यानी कि भ्रष्टाचार।
भ्रष्टाचार की बीमारी सबसे बड़ी और विकराल बीमारी है भारत में।
इसके लिए यदि कुछ ना किया गया तो सारी प्रगति सारा विकास धरा का धरा रह जाएगा।
शायद ही कोई ऑफिस हो चाहे वह प्राइवेट सेक्टर में हो या व सरकारी सेक्टर में हो जो इस बीमारी से अछूता हो।
जय हो हमारे इकनोमिक को नीचे धकेल रहा है हमारी अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। देश में लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ रही है। लेकिन भ्रष्टाचार भी दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है यदि समय रहते कोई सख्त कदम ना उठाया गए तो भारत के लोग अपने आप में संतुष्ट नहीं रह पाएंगे, इस स्थिति में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।
हम मे बहुत को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता है कि देश में कितना भ्रष्टाचार है लेकिन यह यह क्या दूसरे रूप में हमेशा हमें परेशान करता है।
अनपढ़ता अज्ञानता अशिक्षा
देश की दूसरी सबसे बड़ी समस्या है अनपढ़ता अज्ञानता अशिक्षा।
बमुश्किल 75% लोग भारत में पढ़े लिखे यदि हम ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी क्षेत्रों से तुलना करेंगे तो हम या पाएंगे के ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा ज्यादा है। गांव में महिलाओं का हाल और भी बुरा है।
हालांकि प्राथमिक शिक्षा के लिए देश में हर गांव में स्कूल का निर्माण सुनिश्चित किया गया है लेकिन शिक्षा का हाल बहुत ही बुरा है।
आपको ऐसे पांचवी पास विद्यार्थी मिल जाएंगे जो लिखना भी नहीं जानते।
नई शिक्षा नीति से थोड़ी उम्मीदें हैं लेकिन देखते हैं ऊंट किस करवट बैठता है।
शिक्षा के स्तर को बढ़ाना पड़ेगा उसमें कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) के लिए काम होना चाहिए.
हमारी शिक्षा पद्धति बहुत ही ज्यादा थ्योरी बेस्ट है।
प्रैक्टिकल की बारी तो आठवीं नौवीं क्लास के बाद ही आते हैं। मैं फिर दोहरा रहा हूं नई शिक्षा नीति से शायद देश का कुछ भला होगा। कॉलोनी बाद की देन है यह शिक्षा पद्धति जिसमें केवल बाबू क्लर्क नौकर बनने की शिक्षा दी जाती थी।
बहुत ही पहले से याने कि रविंद्र नाथ टैगोर जी के जमाने से इस विषय में बातें चलती हैं देखते हैं अब क्या होता है?
स्वच्छता ना होना
तीसरी बड़ी समस्या है स्वच्छता ना होना।
बड़ी जनसंख्या का भाग ऐसा है जिनके पास घर में टॉयलेट नहीं है।
घर में शौचालय ना होने की वजह से कई प्रकार की बीमारियां पनपती हैं।
बड़ी झुग्गी झोपड़ी कॉलोनियों में अभी तक टॉयलेट नहीं है। जिसकी वजह से लोगों को अभी भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
वजह से हजारों लोग डायरिया हैदराबाद डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं।
कुछ स्कूलों में अभी भी खासकर ग्रामीण स्कूलों में शौचालय ना होने की वजह से लोग बच्चों को विशेषतः कन्याओं को स्कूल नहीं भेजते।
गांधीजी हमेशा स्वच्छता के बारे में बात करते थे उन्हें कई आंदोलन भी शुरू किए लेकिन कुछ विशेष ना हुआ। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री ने इस तरफ खास ध्यान दिया था लेकिन फिर भी बहुत कमी है स्वच्छता की।
पुरानी शहरों में स्वच्छता का बहुत ही बुरा हाल है क्योंकि उनका ढांचा पुराना हो चुका है मल निकास नीपटारा सिस्टम का।
कि उन्होंने स्वच्छता पर काफी काम किया है।
अगली जो समस्या जिसके बारे में मैं बात करना चाहता हूं तेरे व्यवसाय से जुड़ी हुई है हमारा स्वास्थ्य सेवा का ढांचा।
स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा काफी अस्त-व्यस्त है।
हमें इस बात को कहने में कोई संकोच नहीं है कि देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक सरकार भी आम व्यक्ति को उसका अधिकार देने में नाकाम रहे हैं। हैरान होने की बात तो यह है कि हम मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में अग्रणी य हैं लेकिन अपने ही देश के नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में नाकाम है।
क्षेत्रों में आज भी डॉक्टर काम करना पसंद नहीं करते हैं और वहां पर हमेशा डॉक्टरों की कमी बनी रहती है।
डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी खलती है जिसे पूरा करने में सरकार ना काम है।
शिशु मृत्यु दर 23:00 से 35% है प्रत्येक 1000 जन्म पर इसी के साथ पूरी तरह से पोषण ना प्राप्त करना भी बच्चों के लिए संभव नहीं है। स्वच्छता का अपर्याप्त होना भी एक कारण है की हमारे यहां पर हेल्थ केयर कमजोर होता है।
गरीबी
और समस्या के लिए भी मैं यहां बात करना चाहूंगा इस समस्या का नाम है गरीबी।केवल भारत की ही नहीं यह संसार के अधिकतर देशों की समस्या है हमारे यहां गरीबी का स्तर 17% है यानी कि 17% लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं।
भारत के 80% गरीब लोग गांव में रहते हैं राजस्थान उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश बिहार झारखंड उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य हैं जहां की गरीबी का स्तर सबसे ज्यादा है सरकार से अनुरोध है कि उन लोगों के लिए जल्दी ही कुछ करना चाहिए।
गरीबी अशिक्षा के लिए, अस्वच्छता के लिए, बीमारियों के लिए जिम्मेदार है।
प्रदूषण
अन्य समस्या का जिक्र मैं यहां करना चाहूंगा वह प्रदूषण।
वातावरण का दूषित होना प्रदूषण है जो कि भारत में बहुत बढ़ चुका है। भारत के कई शहरों की हवा सांस लेने के लायक नहीं है।
जहरीली हवा में सांस लेते हैं और हजारों की संख्या में मृत्यु और काल के ग्रास में समा जाते हैं।
हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है इन शहरों में रहना मनुष्य के जीवन काल को कम करने के बराबर हो गया है।
औद्योगिक क्षेत्रों में यह हालत और भी गंभीर है यहां सांस लेना मुश्किल है।
लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं जिनमें सांस से संबंधित बीमारियां सबसे ऊपर हैं।
देश की नदियों की बात की जाए तो वह भी प्रदूषित हो चुकी हैं उनमें रह रहे जीव-जंतु भी मार रहे हैं। इकोसिस्टम खतरे में है।
हमें इस क्षेत्र में सुधार के हर संभव प्रयास करने चाहिए अपने स्तर पर, सरकारी स्तर पर, वैश्विक स्तर पर।
बेरोजगारी : उस क्षेत्र में भी हम बिछड़े हुए हैं।
हमारे युवा बेरोजगार हैं उनके पास रोजगार की कमी है। और शिक्षा ही सबसे बड़ा कारण है कि यदि हमारे युवा शिक्षित भी हैं फिर भी उनमें कौशल यानी कि स्किल डेवलपमेंट की कमी है।
हमारी शिक्षा नीतियां ऐसी है जिससे हम केवल रखना जानते हैं।
तो जानते हैं लेकिन प्रैक्टिकल नहीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों का ना लगना, लघु उद्योगों का विकास न होना भी एक कारण है।
हमें लघु उद्योगों के पर काम करना चाहिए।
आज के लिए इतना ही बाकी कुछ अन्य समस्याओं के साथ में फिर चर्चा करूंगा अगले ब्लॉग में।
धन्यवाद।

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