बुधवार, 5 मई 2021

मेरा सभी पढ़ने वालों को संदेश।


 मेरे सभी प्यारे भाई बहनों को मेरा का नमस्कार।

जैसे कि आप सभी को विदित है कि स्थिति हाथ से बाहर निकल चुकी है। नेताओं ने अपने चुनाव करवा लिए हैं अब जनता के ऊपर भारी विपदा आन पड़ी है।

कभी-कभी तो मुझे यह सोचकर आश्चर्य होता है कि हम किस युग में रह रहे हैं क्या यह सही मायने में लोकतंत्र है लोग मर रहे हैं चीख रहे हैं पुकार रहे हैं किसी के पास ऑक्सीजन नहीं है किसी के पास दवाई नहीं।


शासन-प्रशासन हार चुका है क्या ही बोले।

समय रहते यदि महाराष्ट्र में लॉक डाउन लग जाता तो आज यह  दूसरी लहर देखने को ना मिलती। शांति से 2 महीने निकल रहे गए थे उसी समय सरकार को पिछली चुनौतियों से सीखते हुए आगे बढ़ना चाहिए था और अपनी तरफ से सभी काम पूरे करने चाहिए थे दूसरे देशों से सीखना चाहिए था। दूसरी करो ना लहर कब से आ रही थी लेकिन सब व्यस्त है चुनावी रैलियों में ऑफिस दफ्तर खोलने में नौकरियों में जाने के लिए ट्रेनों में भीड़ बढ़ाई जा रही थी सब कुछ सबके सामने हो रहा था समाजिक दूरी का कोई मतलब नहीं था अब इसके परिणाम हमारे सामने है।

हाहाकार मचा हुआ है सब डरे हुए हैं।

लेकिन हमें डरना नहीं है जीवन है, हमें आगे बढ़ना है ।

सभी को वैक्सीनेशन लगवाना है और कुरौना को हराना है।।


कोरोनावायरस में जो स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन से हमें उन्हें फॉलो करना होगा क्योंकि वे काफी अनुभवी डॉक्टरों द्वारा बनाए गए हैं।

बार-बार हाथ धोना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, अनावश्यक रूप से बाहर ना घूमना बहुत जरूरी है।

ववैक्सीनेशन लगवाने तो जाना ही है लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना है कि हम कतारों में ना खड़े हैं भीड़ ना बनाएं समाजिक दूरी का पालन करें और एक दूसरे को सुरक्षित रखें।

दुख की इस घड़ी में सबसे अच्छी बात जो सुनने में आ रही है वह है ओजोन परत का भरना इस परत में हो गया था बड़ा क्षेत्र छेद।

सभी से अनुरोध है पर्यावरण का ध्यान रखें और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं और इस पृथ्वी को रहने लायक जगह बनाएं धन्यवाद आपका मित्र ब्लॉक गी राम इंडिया वाले जय हिंद जय भारत।




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

The Art of Mindfulness: Techniques to Cultivate Present-Moment Awareness

In our fast-paced world filled with distractions and demands, it's easy to get caught up in the whirlwind of thoughts, emotions, and act...